शनिवार, 20 नवंबर 2010

पूजा

दीवार पर कील से टँगे भगवान 
ठीक नीचे खूँटी पर टँगा पसीना
धूप अगरबत्ती? 
नहीं रे, पूजा तो हो गई!
रोटी ठंडी हो रही है,
प्रसाद पा ले। 

7 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ! गज़ब कर दिया चंद शब्दो मे ही सब कह दिया।

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  2. कर्म ही पूजा है
    पसीना बहा लिया
    प्रसाद
    रोटी है।
    ...बहुत खूब।

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  3. कील से टँगे भगवान
    खूँटी पर टँगा पसीना...

    रोटी ठंड़ी हो रही है...

    क्या खूब -विता...

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  4. ऐ किसान तेरी कुटी राजमहल अनुहार।
    एक श्वेद कण ही रहा मोती मोल हजार॥

    गागर में सागर भर दिया आपने।

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