रविवार, 16 दिसंबर 2018

कोई

महरूम आफताब से है दयार कोई, 
तारीकी में ढूँढ़ता कूचा-ए-यार कोई !
मजा लिया बहुत दोस्ती के बोसे में, 
चन्द दिन दुश्मनी रहे गुजार कोई। 
खुश है पतझड़ में बहेलिया बहुत, 
जाल उसकी फँसी है बहार कोई। 
नशेड़ी आँखें संग बिखरी जुल्फों के,
बुलावा भेजो जो दे अब सँवार कोई।
खामोशी सुकूँ नहीं न अश्फाक है, 
थकी समा में भटकती पुकार कोई।

गुरुवार, 8 नवंबर 2018

पटाखे फूटे हैं।

पटाखे फूटे हैं। 
वे हथौड़े टूटे हैं 
जिन के हत्थे चार
तथा मुग्दर पाँच बार
परिवर्तित किये, 
दस नम्बरियों ने
बीस सूत्रियों ने
मेधा पर सवार
चूतियों ने। 

जो समझते हैं कि
शेष है घनक
अशेष है हनक
बालकों की छुन्नियों से
उनके केतु टूटे हैं, 
पटाखे फूटे हैं। 

पटाखे फूटे हैं 
उनके गाँव 
जिसके ठाँव 
ठूठे हैं। 
पटाखे फूटे हैं।

सोमवार, 13 अगस्त 2018

द्विपदियाँ

गर्व वह पानी है,
जो बहल जानी है।
वदन जो रूखा है,
लो, ये रुखानी है।
सजी राजनय युवा,
देश जरा आनी है।
खेत बँटा मेंड़ जो,
आँगन कहानी है।
बोतल के बन्ध अब,
सागर है पानी है।
लटक रही तार पर,
सबकी जवानी है।

शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

जवनिकायें असित

जवनिकायें असित तनने लगी हैं,
टोपियाँ जाली चुभने लगी हैं।
पड़ी जान सासत में देखो हमारी,
कसाइनें सभत्तर कहने लगी हैं।
उपज की मारी खेतियाँ तुम्हारी,
बस करो बस करो रोने लगी हैं।
जमजम पानी तसबीह जुबानी,
अरे राम, हरे राम जपने लगी हैं।
नीर जिनकी कहानी पत्थर की मारी
कुटनियाँ सयानी बनने लगी हैं!

रविवार, 1 अप्रैल 2018

... अन्तमेली

न जा मेरी मुस्कानों पर,
रूदन रोधी अभिनय हैं!
रक्त का जिनके पता नहीं,
वे बने शुद्धि के परिचय हैं!
इतिहासों में नाम नहीं
मुझ पर करते संशय हैं!
पुरखे जिनके वीर्यपात, 
वे ब्रह्मचर्य के दुर्जय हैं!
कुल्हाड़े जिनके निर्दय हैं,
लगते उनको सब हैहय हैं!