सोमवार, 16 मई 2011

रामजन्मभूमि अयोध्या के नाम ...

शायरी की चासनी में सोच की नापाकी परोसना बहुत सुरक्षित है। सुनने वाला शायरी पर मुग्ध होते होते नापाकी की परख ही भूलने लगता है। वाह वाही मिलती है सो अलग। 
अयोध्या विवाद और बाबरी विध्वंस पर कभी किसी ने ये शेर कहकर बहुत वाहवाही लूटी थी: 
सरकशीं की किसी महमूद ने सदियों पहले
इसलिए क्या खूब खबर ली मेरे सर की तुमने,
चंद पत्थर गिराए थे किसी बाबर ने कभी
ईंट से ईंट बजा दी मेरे घर की तुमने। 
इन भावुक दिखती पंक्तियों में वही मक्कारी छिपी है जिसे आजकल ओसामा की मौत नहीं पच रही। महमूद और बाबर से ऐसे जन लगाव नहीं छोड़ सकते। उन्हें याद करते हैं और मूर्ख बनाने को बात ऐसे करते हैं जैसे कोई मतलब ही नहीं! बहुत खूब!
 सरकशीं और 'चन्द पत्थरों' के गिराये जाने से वाकई तकलीफ है तो ठीक करने को आगे क्यों नहीं बढ़ते? उस समय अपने सर और घर नजर आने लगते हैं! बहुत खूब मुल्ला जी, बहुत खूब!!    
 मुझे वाहवाही का लोभ नहीं और न चाहता हूँ कि आप करें। बस गुजारिश है कि मक्कारियों को देखने और समझने हेतु आँख, कान और दिमाग खुले रखें। दिल की बात न कीजिये, पम्पिंग मशीन में सोचने समझने की क्षमता नहीं होती। जो बातें मामूली लग रही हैं, असल में वे नासूर हैं। सँभलिये। मालिकाना हक़ पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय प्रतीक्षित है, उसका सम्मान होना चाहिये लेकिन जबरी के मालिकाना हक़ की लड़ाई में हक़-ए-मुहब्बत को कठमुल्ली सोच की जो आँच सदियों से जला रही है उसका क्या? कभी यह सरकशी बुझेगी भी या ऐसे ही रहेगी? 
मेरे महबूब का घर पत्थर नजर आता है,  
खुद का टाट छप्पर महल नजर आता है। 
चिल्लाने कान फाड़ने को वो दुआ कहते हैं, 
मेरा कराहना उन्हें कहर नज़र आता है। 
निकाल फेंका मवाद सना नेजा जो सीने से, 
उनकी बिलबिलाहटों में भरम नजर आता है। 
राजी हम इश्क-ए-नूर में दीवार बँटवार को, 
उनको दीनो ईमान पर तरस नजर आता है।
क़ौमों की जिन्दगी में सदियाँ मायने रखती हैं, 
रोज सहना उन्हें मंजर-ए-फुरसत नजर आता है। __________________________________________________________
ढाँचे में लगा कसौटी स्तम्भ  

ढाँचे की दीवार में ज्यों का त्यों लगा दिया गया
तोड़े गये मन्दिर का कसौटी स्तम्भ 

प्रतिमा के अवशेष (द्वारपालक?)

12 वीं सदी का एक और अभिलेख जो ढाँचे से मिला


जन्मभूमि खुदाई में ASI को मिला अभिलेख का टुकड़ा

पर्तों में झाँकता सच 

ढाँचे की दीवारों में मिला हरि विष्णु अभिलेख जिसमें गहड़वाल राजा प्रतिनिधि
द्वारा बाली और दशानन रावण नाशक हरि विष्णु के मन्दिर निर्माण की चर्चा है। 

5 टिप्‍पणियां:

  1. एक सुन्दर और ईमानदार प्रयास। एक ईमानदार दिल का दर्द सबको महसूस होता है मगर जब "वे काटें तो प्यार-मुहब्बत, हम बोलें तो अत्याचार" होने लगता है तब ध्यान देना ज़रूरी हो जाता है।

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  2. हाजमा ही खराब हो तो पोष्टिक भी बह जायेगा।

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  3. आईने की तरह साफ है मामला -मगर लोगों की आँखें मुंदी हुयी हैं !

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  4. एक भारतीय सज्जन ओसामा की मजम्मत कर रहे थे - वो दुनियाँ का दूसरा सबसे बड़ा आतंकवादी है। पहला अमेरिका है।

    भारत ऐसे मक्कारों से परिपूर्ण है। कायर और मक्कार!

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  5. गिरिजेश जी बहुत अच्छे .FB पर तिवारी पाण्डे संवाद से लेकर यहाँ तक मानस और मानसिकता बुधिजैविक खाद पानी और पाखंड को शब्द सौन्दर्य दे किये गए बहस की यहाँ तो आपने हवा ही निकाल दी .हम तो सरल शेर के हक़दार हैं .हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम ,वे क़त्ल भी करते हैं ......................... :) .और ज्ञान जी का क्या छक्का लगा है !

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