फरमाइश जब उठी मंच से
'एक विद्रोही कविता हो जाय!'
जेब से निकाल मुड़ा तुड़ा
पहला प्रेमपत्र बाँच दिया
भेजने का साहस भी
न जुटा पाया जिसके लिये।
'एक विद्रोही कविता हो जाय!'
जेब से निकाल मुड़ा तुड़ा
पहला प्रेमपत्र बाँच दिया
भेजने का साहस भी
न जुटा पाया जिसके लिये।




