बुधवार, 28 नवंबर 2012

जन्म, मृत्यु और आइस पाइस


जन्म: 
गिन रहा हूँ आँखें मूँदे एक से सौ तक 
सब छिप जायँ तो आँखें खुलें, गिनती बन्द हो।
मृत्यु:
मिल गया आइस पाइस खेल में आखिरी शाह भी 
चोर ने राहत की साँस ली और खेल खत्म हुआ।


3 टिप्‍पणियां:

  1. जन्म से मृत्यु तक दौडता है आदमी

    दो रोटी एक लंगोटी दो गज कच्ची जमीन

    के खातिर जिन्दगी मे धन जोडता है आदमी

    और जोडते जोडते दम तोडता है आदमी.

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  2. हर ओट पर छिप कर हम समझते हैं कि मृत्यु हमें देख नहीं पा रही है..

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  3. गहन भाव लिये ... उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति।

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