शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

मीत रचो गीत आज

मीत रचो गीत आज, देहों के सजे साज, छुअन अंग बदन काम, मीत रचो गीत आज। 
संयम न ध्यान याम, आदिम हैं राग साम, सहज शब्द नि:शब्द धाम, सूझे भला गीत गान? 
साँसो के तार धार, चुम्बन अधर बार बार, गन्ध मिलन दो विराम, मीत रचो गीत आज। 
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3 टिप्‍पणियां:

  1. @साँसो के तार धार, चुम्बन अधर बार बार, गन्ध मिलन दो विराम, मीत रचो गीत आज।

    पर गीत अधूरा क्यों......

    @ चुम्बन अधर बार बार,
    ...............
    गन्ध मिलन दो विराम,
    मीत रचो गीत आज।

    प्रणय गीत..........???

    मैं कहाँ तक समझा .. कल की विद्वत टीप बता पाएंगी.

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  2. सुंदर -सरल शब्दों में मन के उलझे -सुलझे भावों की बेहद सहज अभिव्यक्ति .

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