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सोमवार, 30 नवंबर 2009

दाल भात में मूसर चन्द


तुम्हारा घमण्ड आत्मविश्वास है
हमरा विश्वास भी दम्भ है।
तुम कहो तो पांडित्य आलोचना है
हम कहें तो दाल भात में मूसर चन्द है।
तुम लिक्खो तो नए प्रतिमान हैं
हम जो रचे तो लन्द फन्द है। 
मिठाई हमरी माछी भरी सूगर की बिमारी
तुम्हरी सीसे में सजी कलाकन्द है।
एक्के जगह बँधा रच्छासूत 
हमरा चिरकुट तुम्हरा कंगन बाजूबन्द है।
दम्भ
मूसर चन्द
लन्द फन्द
कलाकन्द
कंगन बाजूबन्द
तुकबन्दी में है लेकिन 
ऍब्सर्ड सा समुच्चय है न ? 
...
...
समझो
ये आदत छोड़ दो न !