गुरुवार, 9 जुलाई 2009

वह

घोषित 'विराम' से थोड़ा विराम मिला तो ब्लॉगवाणी पर गया। पहली दृष्टि गई वर्तिका नन्दा की कविताओं पर आनन्द राय की एक पोस्ट पर। आनन्द जी की पोस्ट के बजाय मैं वर्तिका नन्दा के ब्लॉग पर गया तो वहाँ टिप्पणी के रूप में मुझे यह कविता दिखी, जो मैंने उन्हीं के शब्द उधार ले रच दिया था। उन्हों ने बहुत दिनों बाद इस टिप्पणी को प्रकाशित किया।

इतने छोटे विराम का लाभ ले यही कविता पोस्ट कर रहा हूँ। शब्द (शायद भाव भी) साभार: सुश्री वर्तिका नन्दा
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दिन
साबुन
ख्याल
धूप।

हमने
सपने धो
डाल दिए
सूखने।

सूनी आँख
साथ रात
जो जगी
वह कविता थी।

8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर कविता है पहले भी पढी थी उनाके ब्लोग पर आभार्

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  2. मेरा नाम भी बृजमोहन ही है |गवेषणा शब्द की व्याख्या व उदगम बतलाया अच्छी जानकारी मिली व्रज से ब्रज बनना |गायों को "भिनसारे " छोडा जाना बहुत दिन बाद यह शब्द पढ़ कर अच्छा लगा _भोर भी कहते है |गोधूली शब्द वाबत भी जानकारी मिली |हमारे यहाँ इतना ही सुना करते थे कि गोधूली के फेरा है (शादी में )|जानकारी अच्छी लगी

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  3. गवेषणा शब्द पर आपकी टिप्पणी देख कर आप तक आया ,कविता देख कर उस ब्लॉग पर गया जिनकी कविता का आप ने सारांश चाँद शब्दों में निकला | हम पढ़ते थे तब तकरीवन पचास साल पहले हम से प्रेसी करवाई जाती थी एक पेज का सारांश चाँद लाइनों में आना चाहिए ,वह याद आगया

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  4. Sabhi rachnayen padh gayee...sadagee aur sundarta se bharpoor...!

    "baagwaanee' pe tippanee ke liye dhnywad..! Jin paudhon ke hindi naam nahee diye hain,wo 'gualr' ya bargad pariwar ke hain...

    http://shamasansmaran.blogspot.com

    http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.blogspot.com

    http://lalitlekh.blogspot.com

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    http://shama-baagwaanee.blogspot.com

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