दीवार पर कील से टँगे भगवान
ठीक नीचे खूँटी पर टँगा पसीना
धूप अगरबत्ती?
नहीं रे, पूजा तो हो गई!
रोटी ठंडी हो रही है,
प्रसाद पा ले।
प्रसाद पा ले।
जो दूसरों की हैं, कवितायें हैं। जो मेरी हैं, -वितायें हैं, '-' रिक्ति में 'स' लगे, 'क' लगे, कुछ और लगे या रिक्त ही रहे; चिन्ता नहीं। ... प्रवाह को शब्द भर दे देता हूँ।