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रविवार, 3 जनवरी 2010

गए बिहाने सजन

लगन की बात न करो रे सजन
लगे है पवन में अगन रे सजन।

कुमकुम उतरी अधर में सजन
संझा की लाली है देखे सजन।

नेवत रही अँखियाँ निहारें सजन
जवानी भी करती है कैसे भजन।

मैं तो हूँ चुप खन चूड़ी खनन
मइया बुलाएँ,क्या बहाने सजन!

सिमट गए बोल आखर अखर
खुल गई बातें, सँभाले सजन।

चुम्बन की बरखा अन्हारे सजन
कागज बिना जो पढ़ाए सजन।

पीर सिमटी कहाँ जो बताएँ सजन
आँसु राँधा बिजन,गए बिहाने सजन।