... मैंने तुम्हें पढ़ना छोड़ दिया है,
नहीं देख सकता तुम्हें यूँ चुकते हुए।
तुम्हारे वे शब्द जिनमें जीवन टहलता था,
प्रसिद्धि के गलियारों में भटक गए हैं।
नहीं देख सकता तुम्हें यूँ चुकते हुए।
तुम्हारे वे शब्द जिनमें जीवन टहलता था,
प्रसिद्धि के गलियारों में भटक गए हैं।
मेरे घुटने अब दर्द करते हैं,
तुम्हारे साथ नहीं चल सकता।
तुम्हारे साथ नहीं चल सकता।
ऐसे ही एक दिन पत्रों की पिटारी खोली
उनमें शब्द अभी भी छलकते हैं
मैंने उन पर हाथ जो फेरा,
अंगुलियाँ नीली हो गईं
जाने क्यों उन आँखों में सीलन सी लगी
जिनमें 'टियर ड्रॉप' डालने को डॉक्टर ने बताया है।
उनमें शब्द अभी भी छलकते हैं
मैंने उन पर हाथ जो फेरा,
अंगुलियाँ नीली हो गईं
जाने क्यों उन आँखों में सीलन सी लगी
जिनमें 'टियर ड्रॉप' डालने को डॉक्टर ने बताया है।
स्क्रीन पर तुम्हारी लिखाई नहीं देख पाता
चकाचौंध से आँखों में किचमिची सी होती है
तब जब कि मेरे मन ने कहा है -
"तुम उससे जलते हो।"
मेरे हाथ में तुम्हारे वही छ्लकते पत्र हैं
इन्हें आज तक क्यों नहीं जला पाया?
चकाचौंध से आँखों में किचमिची सी होती है
तब जब कि मेरे मन ने कहा है -
"तुम उससे जलते हो।"
मेरे हाथ में तुम्हारे वही छ्लकते पत्र हैं
इन्हें आज तक क्यों नहीं जला पाया?