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बुधवार, 15 अगस्त 2012

ई ह अजादी..जीये जीये हिन्दुस्तान


ऊ आजादी पवलें भइया
जिनकर नाव नँगरेस महान 
भगई बाबा बाप हो गइलें 
चाचा नामी नेहर सयान। 

राजा बदलल परजा वइसे
जीये जीये हिन्दुस्तान 
गदहा जनम एक के छूटल 
पहिर गुलाबी बनल परधान।

लइका भटके दारू पीये 
बाप पखंडी लगलें घाट 
एक अकेल छौंड़ी हमरी
क द परजा लाट के ठाठ।

बिटिया रानी बड़ी सयानी 
घोघ्घो खेले पानी छाड़ 
सीमा पर कटल जवानी 
चचा निहारें नोबल ठाड़।

दुस्मन के मूड़ी दे गइलें
अम्मा छाती परजा असवार 
एमरजेंसी फफेल्ला धइलस
फूट टूट लूट बड़वार।

अम्मा दुरगा कतल हो गइली 
बेटवा कर कर करे करार
तोप तोप के घोंप घोटाला 
पोप देस जोरू भरतार। 

बेटवा सेना सांती पोसे 
कटें हजारो लंका के तीर 
फाटल धरती मूड़ अकासी 
धन्न धन्न जय बंता बीर।

राजा के रजधानी वइसे 
परदा पीछे रानी मुसमाति 
मौनी बाबा ताज असमानी 
घोटालन भाँति के भाँति। 

राज बदलिहें परजा वइसे
जीये जीये हिन्दुस्तान 
गदहा जनम एक के छूटी  
अरबो खरबो हिन्दुस्तान।

शनिवार, 23 जुलाई 2011

बोलऽ काकी! का करबू?

आँखि से पानी काढ़े के?
तोहरे घुघटा के आड़े से।
पोखरा परधानी खूब खोनवलें 
हराम के पइसा खूब बनवलें 
बासमती के माड़ पसइबू कि
आपन दस्खत खुदे बनइबू? 
बोलऽ काकी! का करबू? 


सावन में बा कथ्था बइठल
बत्ता बत्ता बथ्था अँइठल। 
मूड़ मरोर के पुन्न कमइहें
सुई दवाई गोली सब अनिहें 
गैस जरा के चिखना तरबू कि 
कक्का के मुँह झौंसा करबू? 
बोलऽ काकी! का करबू? 


छम्मकछल्लो गाड़ी चमके 
बड़ी सहर के साड़ी दमके। 
एक के तीन रजिस्टर में चढ़ि गे 
हँसे मँगरुआ बिधना पढ़ि के 
मुरगा दारू अइँठि भँजइबू कि  
धनिया के पेट से बिपदा हरबू?
बोलऽ काकी! का करबू?  

बुधवार, 13 जुलाई 2011

सावन में काली माई

सूखे ई सावन मनवा के धार
जोगी जनि आवऽ हमरे दुआर।

बदरी तनिहें काली माई
झम झम बरसिहें काली माई
नीब नगीचे न कौनो जाई
जगती पर बरही रहि जाई
कइसे झुलिहें पेंगी पार?
जोगी जनि आवऽ हमरे दुआर।

जर जड़इया काली माई

बिस्तर पर सुतिहें काली माई
टीबी देखिहें काली माई
कजरी छटिहें काली माई
रोअते रहि जाई नीबिया छतनार
जोगी जनि आवऽ हमरे दुआर।