जो दूसरों की हैं, कवितायें हैं। जो मेरी हैं, -वितायें हैं, '-' रिक्ति में 'स' लगे, 'क' लगे, कुछ और लगे या रिक्त ही रहे; चिन्ता नहीं। ... प्रवाह को शब्द भर दे देता हूँ।
न प्रीत न गीत राह किनारे रीत बैठ न पाया बजता रहा जो संगीत मनमीत तुमसे बिछुड़न का कैसी यह धुन जो साथ गाई अब भी बजती शहनाई मैं संगत करता शबनम सा आकाश छोड़ हवा संग धरती पर सूख चले रवि संग पुन: नभ तक रहना गिरना उठना चलना राह किनारे रीत बैठ न पाया बजता रहा जो संगीत मनमीत तुमसे बिछुड़न का अवसाद ढले शाम चले दीप जलें टुकुर टुकुर नेह नीर बन जाँय जुगनू पलक झपकें धूल धूसरित बूँदे गिर बुझ टपक पड़े रात मन काट काट सहस मसक बजता रहा संगीत तुमसे बिछुड़न का आसमान भटक रहे कितने ही रोगी सब ठहर गए ठाँव ठाँव जो आँख धसा व्याध तीर नभ सरि नींद चीखती गई भाग पूरब संग रँग गई लाल चुरा ललाई नयनों से सो न सका बजता रहा जो संगीत मनमीत तुमसे बिछुड़न का।